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खबर उजाला विशेष संवाददाता – राजनीतिक दबाव और संगठन के फैसले को चुनौती देकर दर्ज की रिकॉर्ड जीत; गोल्ज्यू मंदिर में शीश नवाकर शुरू किया था प्रचार
हल्द्वानी: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से टिकट न मिलने की बेरुखी भी आर्यन बेलवाल के इरादों को डिगा नहीं सकी। जब संगठन ने उनका नाम दरकिनार किया, तो उन्होंने हार मानने के बजाय सीधे छात्रों की अदालत में जाने का फैसला किया। माता-पिता के चरणों में शीश नवाकर और कुमाऊँ के न्याय के देवता ‘श्री गोलज्यू महाराज’ का आशीर्वाद लेकर आर्यन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में कूदे और एम.बी. पीजी कॉलेज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिख दिया।
संगठन का फैसला बना छात्रों की हमदर्दी:
वर्षों तक संगठन के लिए जी-तोड़ मेहनत करने के बाद अंतिम समय में टिकट न मिलना किसी भी युवा कार्यकर्ता का मनोबल तोड़ने के लिए काफी था। लेकिन आर्यन ने इस निराशा को अपनी ताकत बनाया। उनके निर्दलीय मैदान में उतरते ही आम छात्र-छात्राओं की सहानभूति और समर्थन उनके साथ जुड़ता चला गया। छात्रों के बीच यह संदेश स्पष्ट गया कि यह चुनाव किसी बड़े संगठन का नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले एक आम छात्र का है।
न्याय के देवता से मांगी थी मन्नत:
नामांकन से ठीक पहले आर्यन बेलवाल ने प्रसिद्ध गोलज्यू मंदिर पहुँचकर पूजा-अर्चना की और न्याय की अर्जी लगाई। उनके समर्थकों का मानना है कि गोलज्यू महाराज की कृपा और समर्थकों के निस्वार्थ भाव से दिन-रात किए गए चुनाव प्रचार का ही नतीजा है कि उन्होंने दिग्गजों को पछाड़कर अध्यक्ष पद की कुर्सी पर शानदार कब्जा जमाया।
”जब नीयत साफ हो और साथ में न्याय के देवता का आशीर्वाद हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। संगठन ने साथ छोड़ा, लेकिन कॉलेज के हजारों भाई-बहनों और गोलज्यू महाराज ने हाथ थाम लिया।”
— आर्यन बेलवाल, नवनिर्वाचित अध्यक्ष, एम.बी. पीजी कॉलेज
