हल्द्वानी – खबर उजाला स्पेशल न्यूज़ (विशेष संवाददाता): एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव का बिगुल बजते ही छात्र राजनीति का पारा चरम पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा नजरें अध्यक्ष पद की कुर्सी पर टिकी हुई हैं, जहां मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो चला है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) से मेहुल सामंत, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से धीरज बिष्ट और ABVP के ही बागी प्रत्याशी के रूप में निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
NSUI का दांव: मेहुल सामंत पर भरोसा
NSUI ने इस बार मेहुल सामंत को अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। मेहुल की कॉलेज परिसरों में लगातार सक्रियता और छात्र हितों के मुद्दों को लेकर किए गए आंदोलन उनकी सबसे बड़ी ताकत माने जा रहे हैं। कैंपस में छात्र-छात्राओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ और संगठन के कैडर वोट के दम पर NSUI अध्यक्ष पद पर अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है।
ABVP की साख का सवाल: धीरज बिष्ट मैदान में
दूसरी ओर, ABVP ने धीरज बिष्ट पर दांव खेला है। ABVP के लिए यह चुनाव साख का सवाल बना हुआ है। धीरज बिष्ट अनुशासित संगठन, राष्ट्रवादी मुद्दों और पिछले वर्षों में कॉलेज में कराए गए विकास कार्यों के आधार पर वोट मांग रहे हैं। ABVP का एकमुश्त कैडर वोट और संगठनात्मक रणनीति धीरज को मजबूत स्थिति में खड़ा करती है।
बागी आर्यन बेलवाल बने ‘एक्स-फैक्टर’
चुनाव में असली रोमांच ABVP से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल ने पैदा कर दिया है। संगठन से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय ताल ठोक रहे आर्यन को युवाओं और कॉलेज के एक बड़े छात्र समूह का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आर्यन न केवल ABVP के वोटों में सेंध लगा सकते हैं, बल्कि चुनाव का पूरा गणित बिगाड़कर ‘किंगमेकर’ या ‘विजेता’ के रूप में उभर सकते हैं।
वोटों का समीकरण और जीत की चाबी
कॉलेज परिसर में दिन-रात जारी प्रचार, जनसंपर्क और चुनावी सभाओं से माहौल गर्माया हुआ है। जहाँ NSUI अपनी एकजुटता का फायदा उठाने की कोशिश में है, वहीं ABVP अपने कैडर को सहेजने में जुटी है। निर्दलीय आर्यन बेलवाल की बढ़ती लोकप्रियता ने दोनों बड़े दलों के पसीने छुड़ा दिए हैं।
अब देखना यह होगा कि आम छात्र-छात्राएं एनएसयूआई के काम पर मुहर लगाते हैं, एबीवीपी के संगठन पर भरोसा जताते हैं या फिर निर्दलीय बागी का झंडा बुलंद करते हैं। फैसला चुनाव परिणाम के दिन ही साफ हो पाएगा, लेकिन फिलहाल मुकाबला बराबरी का और बेहद रोमांचक बना हुआ है।
