बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली
भारतीय सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी के भाव में गिरावट के रुझान के बीच वैश्विक ब्रोकरेज संस्था बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के एक ताजा आउटलुक ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। लंबे समय से सोने में तेजी (Bullish) की राय रखने वाले बैंक ऑफ अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव की संभावना जताते हुए सतर्क रुख अपनाया है।
बैंक का मानना है कि यदि कुछ नकारात्मक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां एक साथ लागू होती हैं, तो सोने की वैश्विक कीमतें गिरकर $3,500 – $3,750 प्रति औंस के स्तर तक आ सकती हैं। भारतीय रुपये में यह स्तर ₹1.08 लाख से ₹1.15 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में बैठता है।
क्यों बदला बैंक ऑफ अमेरिका का रुख? मुख्य कारण:
ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें:
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के भाव में उछाल से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। यदि कच्चा तेल $150 प्रति बैरल के आसपास पहुंचता है, तो इससे आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ेगा।
केंद्रीय बैंकों द्वारा संभावित सोने की बिकवाली (Central Bank Selling):
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कई देशों के व्यापार घाटे (Current Account Deficit) और करेंसी पर दबाव बढ़ेगा। BofA के मुताबिक, अपनी मुद्रा को सहारा देने और विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के लिए कुछ केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार की बिकवाली कर सकते हैं। (दूसरी तिमाही में तुर्की सहित कुछ केंद्रीय बैंकों द्वारा ~60 टन सोने की बिकवाली का रुझान देखा गया था)।
निवेश मांग (ETF Inflows) में सुस्ती:
बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों का कहना है कि सोने को $5,000 प्रति औंस (भारतीय बाजार में लगभग ₹1.55 लाख) तक पहुंचाने के लिए गोल्ड ETFs और संस्थागत निवेशकों से 14%-15% की अतिरिक्त मजबूत मांग की दरकार थी। मौजूदा स्तर पर रिटेल और संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली कीमतों को नीचे धकेल सकती है।
